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क्या हैं एग्जिट पोल्स, कितने सटीक होते हैं उनके रिजल्ट्स?

एग्जिट पोल्स वोट करके पोलिंग बूथ के बाहर आए लोगों से बातचीत या उनके रुझानों पर आधारित हैं. इनके जरिए अनुमान लगाया जाता है कि नतीजों का झुकाव किस ओर है.

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव आखिरी पड़ाव पर हैं. शुक्रवार को राजस्थान की 199 सीटों और तेलंगाना की 119 सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं. मिजोरम, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के लिए वोट डाले जा चुके हैं. पांचों राज्यों में चुनावों के असली नतीजे तो मंगलवार को वोटों की गिनती के बाद घोषित होंगे. लेकिन एक्जिट पोल शुक्रवार यानि 07 दिसंबर की शाम से ही चुनाव के संभावित रुझान दिखाने शुरू कर देंगे.

राजस्थान में जहां मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. वहीं, तेलंगाना में सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समति(टीआरएस), कांग्रेस-टीडीपी गठबंधन और बीजेपी में त्रिकोणीय मुकाबला है. एग्जिट पोल सात दिसंबर की शाम से ये अंदाज लगाने लगेंगे कि 12 दिसंबर को आने वाले नतीजों में कौन सी पार्टी अपनी सरकार बना रही है.

ऐसे में ये सवाल उठना स्वाभाविक है कि ये एग्जिट पोल्स क्या होते हैं और चुनाव परिणामों को लेकर वो जो अनुमान लगाते हैं, वो कितने सटीक होते हैं.

1. एग्जिट पोल्स क्या होते हैं और वो कैसे किए जाते हैं?

– एग्जिट पोल्स वोट करके पोलिंग बूथ के बाहर आए लोगों से बातचीत या उनके रुझानों पर आधारित हैं. इनके जरिए अनुमान लगाया जाता है कि नतीजों का झुकाव किस ओर है. इसमें बड़े पैमाने पर वोटरों से बात की जाती है. इस कंडक्ट करने का काम आजकल कई आर्गेनाइजेशन कर रहे हैं.

2. एग्जिट पोल्स को टेलिकास्ट करने की अनुमति वोटिंग खत्म होने के बाद ही क्यों दी जाती है. इससे पहले क्यों नहीं?
– जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126 ए के तहत वोटिंग के दौरान ऐसी कोई चीज नहीं होनी चाहिए जो वोटरों के मनोविज्ञान पर असर डाले या उनके वोट देने के फैसले को प्रभावित करे. वोटिंग के दौरान से लेकर वोटिंग खत्म होने के डेढ़ घंटे तक एग्जिट पोल्स का प्रसारण नहीं किया जा सकता है. और ये तभी हो सकता है कि जब अंतिम दौर के सारे चुनावों की वोटिंग खत्म हो चुकी हो.

3. क्या एग्जिट पोल्स हमेशा सही होते हैं?
– नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. अतीत में ये साबित हुआ है कि एग्जिट पोल्स ने जो अनुमान लगाए, वो गलत साबित हुए. भारत में एग्जिट पोल का इतिहास बहुत सटीक नहीं रहा है. कई बार एग्जिट पोल नतीजों के बिल्कुल विपरीत रहे हैं.

4. ओपिनियन पोल्स और एग्जिट पोल्स के बीच अंतर क्या है?
– ओपनियन पोल्स वोटिंग से बहुत पहले वोटरों के व्यवहार और वो क्या कर सकते हैं, ये जानने के लिए होता है. इससे ये बताया जाता है कि इस बार वोटर किस ओर जाने का मन बना रहा है. वहीं एग्जिट पोल्स हमेशा वोटिंग के बाद होता है.

5. ये कब शुरू हुए?
माना जाता है कि ये 1967 में सामने आए. एक डच समाजशास्त्री और पूर्व राजनीतिज्ञ मार्सेल वान डेन ने देश में चुनाव के दौरान एग्जिट पोल्स किया. हालांकि ये भी कहा जाता है कि इसी साल अमेरिका में ऐसा पहली बार एक राज्य के चुनावों के दौरान किया गया था. वैसे एग्जिट पोल्स जैसे अनुमान की बातों का 1940 में होना कहा जाता है.

6. इनका विरोध क्यों हो रहा है?
– क्योंकि आमतौर पर ये न तो बहुत वैज्ञानिक होते हैं और न ही बहुत ज्यादा लोगों से बातकर उसके आधार पर तैयार किए जाते हैं. इसीलिए अमूमन ये हकीकत से अक्सर दूर होते हैं. कई देशों में इन पर रोक लगाने की मांग होती रही है. भारत में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने इस पर रोक लगा दी थी. दुनियाभर में अब ज्यादातर लोग इन्हें विश्वसनीय नहीं मानते.

(Courtesy: News18)

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